बुधवार, 20 फ़रवरी 2008

खेल हो जायेगा काम-हास्य शायरी

बिक गए खिलाड़ी सरेआम
अब कौन कर सकता है उनको बदनाम
पहले खेले तो पैसा और नाम कमाया
फिर पैसे ने ही खेल खिलाया
और अब तो खिलाड़ी क्या खेलेंगे
क्या लोग देखेंगे
पैसा ही खेलेगा और देखेगा
खिलाड़ी और दर्शक तो होंगे शोपीस
जिसके पास होगा जितना पैसा उतना नाम
क्रिकेट खेल नहीं, हो गया धंधा और काम
क्रिकेट के बैट और बल्ले कम बिकेंगे
खेलने से पहले नन्हें खिलाड़ी
नीलामी में बिकने के लिए सजे दिखेंगे
बल्ला और बाल बाद में थामेंगे
पहले अपने हाथ बढाकर दाम मांगेगे
फिर खेल के लिए नहीं
बल्कि घर से निकलेंगे करने काम
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